गिल्टी का उपचार क्या है गिल्टी के लक्षण, इलाज और दवा ?


       गिल्टी एक तरह का ट्युमर यानी कि गाठ है. इसकी वजह से कई लोगों को परेशानी होती है. गिल्टी, हमारे शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे कि हमारे गर्दन, जांघ और शरीर के अन्य हिस्सों में उत्पन्न होता है. कई लोग इसे इग्नोर करते है लेकीन हम आपको बता दें कि ये एक बेहद गंभीर बिमारी है. यदि शुरुवाती दिनों में इसका इलाज नहीं किया गया तो इससे बिमारी कई घातक रोगों जैसे कि कैंसर या टीबी आदी के होने की संभावना प्रबल होती होती है. दर असल शुरू में छोटे रूप में होने के कारण लोग इसे उपेक्षित करते है. आइए प्रस्तुत लेख के माध्यम से गिल्टी के उपचार के बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त करें. 




क्या है गिल्टी के लक्षण :- 

  • गिल्टी की परेशानी झेलने वाले लोगों के गले में दर्द की समस्या देखी जाती है. 
  • गिल्टी पिडीतों को हल्की बुखार की भी परेशानी हो सकती है. 
  • जब आपको गिल्टी होती है तो आपके गले में खसखसाहट भी रहती है. 
  • गिल्टी के दौरान जब भी आप कुछ खाकर निगलते है तो आपको दर्द का अनुभव होता है. 
  • कई बार इसके पिडीतों को बोलने में भी कठिनाई का अनुभव होता है. 


गिल्टी का उपचार :- 

  • मेथी :- गिल्टी को दूर करने में मेथी सकारात्मक भूमिका निभाता है. इसके लिए आपको मेथी के दाने या इसके पत्ते को पिसकर लेप बनाना होगा और इसका लेप बन जाने के बाद इसे गिल्टी वाले क्षेत्र में लगाकर कपडे से बाँँध दें. इसी प्रक्रिया को रोजाना गिल्टी के खत्म हो जाने तक दोहराए. 
  • निम :- निम कि औषधीय उपयोगिता या अन्य उपयोगिता किसी से छुपी नही है. जाहीर है कई रोगों में निम के पत्ते या निम के तेल के सीधे-सीधे इस्तेमाल से आप राहत पा सकते है. आप निम के तेल से मालिश भी कर सकते है. 
  • आकडे का दुध :- आकडे के पौधे का इस्तेमाल भी आप गिल्टी के उपचार में कर सकते है. इसके दुध में मिट्टी मिलाकर इसे गिल्टी प्रभावित क्षेत्रों में लगाए ऐसा कुछ दिनों तक करते रहने से गिल्टी के मरीजों को आराम मिलता है. 
  • चुना :- यदि आप गिल्टी से जल्द से जल्द निजात चाहते है तो आपको इसके लिए चुना की सहायता लेनी होगी. यदि रोजाना रात को सोने से पहले चुना और घी का लेप बनाकर इसे गिल्टी पर लगाए तो आपको तुरंत लाभ मिलता है. 
  • कचनार कि छाल और गोरखमुंडी :- कचनार एक वृक्ष है जबकी गोरखमुंडी एक घास है गिल्टी के उपचार में इसका इस्तेमाल करने के लिए कचनार के सुखी छाल को हल्का पिसकर इसे एक ग्लास पानी में डालकर २-३ मिनट तक अच्छी तरह गर्म करें. इसके बाद इसमें एल चम्मच पीसी हुई गोरखमुंडी डालकर पुन:२-३ मिनट तक उबालें. इसके थंड हो जाने पर नियमित रूप से दिन में दो बार लें. इससे गिल्टी में राहत मिलेगी.  

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